Saturday, October 20, 2018

Top 8 Designing Course in India | डिजाइनिंग में कौन - कौन से कोर्स है | डिजाइनिंग में कौन सा कोर्स करे

Top 8 Designing Course in India | डिजाइनिंग में कौन - कौन से कोर्स है



डिजाइनिंग की दुनिया -


दोस्तों! कैसे हो आप सभी, आज बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक लेकर आया हूँ आप सब के लिए, अभी तक मैंने आपको ग्राफ़िक डिजाइनिंग के बारे में बताया था, अब आठ डिजाइनिंग करियर  जो आपके सामने नौकरी के अनगनित दरवाजे खोल देगें डिटेल में आप को समझाने की कोशिश करूंगा |


क्या आप जानते है 15प्रतिशत छात्र जानते ही नही कि डिज़ाइनर को कमाने के लिए क्या करना पड़ता है? या उसकी दिनचर्या क्या होती है, काम का समय क्या होता है या सबसे महत्वपूर्ण बात की वे डिजाईन कैसे करते है? डिजाइनिंग इंस्टिट्यूट में प्रवेश के लिए तैयारी करवाने वाले ट्रेंड्स अकादमी ऑफ़ फैशन द्वारा करवाए गये एक सर्वे में यह सामने आया कि 15 प्रतिशत छात्र जानते ही नही कि वे डिज़ाइनर बनना भी चाहते है या नही | दसवी और 12वी के छात्रों पर किये गये सर्वे अध्ययन में जब उनसे करियर की पसंद के बारे में पूछा गया तो 70 प्रतिशत डॉक्टर या इंजिनियर बनना चाहते थे या एमबीए करना चाहते थे, जबकि २९ प्रतिशत डिजाइनिंग और दूसरे विकल्प को लेकर निर्णय नही ले पाए थे और सिर्फ १ प्रतिशत छात्र डिजाईन के छेत्र में जाना चाहते थे | इन आकड़ो के तीन अर्थ निकलते है | पहला, डिजाइनिंग में अपने करियर को लेकर बहुत फोकस होना पड़ेगा, दूसरा, इनमे प्रतियोगिता बहुत कम है और तीसरा, इनमे सफल होने के लिए आपको 70 प्रतिशत वाले वर्ग में शामिल नही होना पड़ेगा | अगर आप २९ प्रतिशत वाले वर्ग में भी है तो आपके सफल होने के अवसर बढ़ जाते है क्युकि डिजाइनिंग ऐसा छेत्र है, जो आपको पढ़ाई रूप में सबसे तेज होने की मांग नही करता, लेकिन इन सबसे पहले यह सवाल खड़ा होता है कि कैसे पता लगाया जाये कि व्यक्ति में डिज़ाइनर बनने या मशहूर संस्थान जैसे एनआईडी/निफ्ट आदि में प्रवेश लेने की छमता है? इस सवाल के जवाव में अपने आप से तार्किक सवाल पूछे 'अगर मैं डॉक्टर बनता/बनती हूँ तो मैं मरीजों का इलाज करूंगा/करूंगी, लेकिन डिज़ाइनर बनने के बाद मैं क्या करूंगा/करूंगी?' उत्तर आसान है अगर कुछ चाहिए तो वह है वस्तुओं को देखने का अनोखा तरीका, खुला दिमाग, अपने हाथों कुछ बड़ा करने की लालसा | इसके आलावा अगर आपको लोगों के साथ मीटिंग करना अच्छा लगता है, लोगों के कपड़े पर ध्यान देना अच्छा लगता है, उनकी लुक्स पर ध्यान देना अच्छा लगता है, आपको सफेद दीवारों पर रंगीन चित्र बनाने अच्छे लगते है, अगर आपको दोस्तों की ज्वेलरी पसंद आती है या आपको ग्राफ़िक और मीडिया advertisement अच्छे लगते है तो आप वह व्यक्ति है, जिनकी डिजाइनिंग संस्थानों को जरूरत है | दोस्तों!


दोस्तों! "मैंने अपने पिछले ब्लॉग में आप को  डिटेल में बता दिया है डिजाइनिंग कोर्स के सबसे अच्छे और इंडिया के टॉप १० डिजाइनिंग कॉलेज के बारे में आप डिटेल में पहले जाकर वो वाला ब्लॉग पढ़ लीजिये "


नये रास्ते - 

Best 8 Designing Course in INDIA | डिजाइनिंग में कौन सा कोर्स करे -


1. किस्सों और कहानिओं की दुनिया - एनीमेशन -

बड़े अन्तर्राष्ट्रीय उधोग संसथान जैसे वाल्ट डिज्नी, पिक्सर, आईमैक्स, सोनी, जैसी बड़ी कंपनिया भारतीय एनीमेशन बाजार से अपनी जरूरतों को पूरा करना चाहती है | अन्य बड़ी कंपनियां भारतीय एनीमेशन बाजार के माध्यम से अपनी विज्ञापन और कंप्यूटर गेम्स की एनीमेशन जरूरतों को पूरा कर रही है | विकास की इस तीव्र गति के कारण कुछ ही समय भारत एनीमेशन की दुनिया में एक बड़ा नाम बन गया है | एरीना एनीमेशन के निदेशक गौतम कक्कर के अनुसार बर्तमान में भारतीय एनीमेशन इंडस्ट्री की विकास दर 7.5  प्रतिशत है | एक अमेरिकन एनिमेटर एक घंटे के लिए जहाँ 125 USA Dolor लेता है वही भारतीय एनिमेटर एक घंटे का सिर्फ 25 USA Dolor लेता है | यह अनुमान लगाया जा रहा हैकि एनीमेशन और इसमें अपना करियर बनाने का सपना देखने वालों का भविष्य भी उज्ज्वल है और दूसरी तरफ कोई भी छात्र इस छेत्र में अपना भविष्य बना सकता है | इसके बढ़ते विकास से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द ही भारतीय एनीमेशन का बाजार ही भारत के फिल्म उधोग से भी बड़ा होगा | याद तो होगा "क्त्त्पा ने बाहुबली को क्यों मारा" आपकी सबसे प्यारी मूवी और मेरी भी "बाहुबली" पार्ट 1और पार्ट 2 कैसे भूल सकते हो आप सभी एनीमेशन का ही कमाल है दोस्तों, इंडिया की अब तक की सबसे बड़ी मूवी, और अब रोबोट-2, हॉलीवुड में भीड़ लगी है इस तरह की फिल्मों की मजा आ जाता है देख कर लगता है सब कुछ रियल में हो रहा है, ऐसा ही है न दोस्तों!


योग्यता - 10 प्लस 2 के बाद एनीमेशन में डिप्लोमा, ग्रेजुएशन अवधि: ६ महीने से ५ वर्ष |
शुरुआत - 7,000 से 20,000 प्रतिमाह (फिर एक्सपीरियंस पर डिपेंड हो जाती है आपकी इनकम, बहुत अच्छा ग्रोथ है) |
भविष्य - 3 लाख के भीतर 35,000 से 1,00,000 रुपया प्रतिमाह |
काम - 2 डी व 3 डी एनिमेटर, कैरीकैचर, कवर पेज, कार्ड, कॉमिक बुक, कंप्यूटर व मोबाइल गेमर |
संसथान - दोस्तों आप मेरा पिछला ब्लॉग जरुर रीड कर ले, इंडिया के टॉप 10 डिजाइनिंग कॉलेज |


2. जादू बुने हजार - फैशन डिजाइनिंग -

फैशन डिजाईन काउंसिल ऑफ़ इंडिया तथा मैनेजमेंट कंसलटेंट केपीएमजी के ताजा अध्ययन के अनुसार भारत में डिज़ाइनर वियर एक महत्वपूर्ण उभरते हुए छेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है | पर्ल अकादमी ऑफ़ फैशन के ग्रुप डायरेक्टर ए.के.जी. नायर के अनुसार वर्तमान में भारतीय फैशन डिजाईन उधोग का कारोबार एक सौ अस्सी करोड़ रुपए का है जिसके आने वाले पांच से दस वर्षो के बीच एक हजार करोड़ रुपए का हो जाने का अनुमान है | अनुमान है कि बड़े डिज़ाइनर की सालाना विक्री लगभग 250 मिलियन रुपए है | इस प्रकार, हम कह सकते है कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर डिज़ाइनर वियर या फैशन अति विकसित उधोग है | फैशन का बाजार लगभग 35 बिलियन Dolor का है जिसमे प्रति वर्ष ९ प्रतिशत की वृद्धि हो रही है | डिज़ाइनर वियर की मांग और बड़े स्तर पर होने वाला निर्यात फैशन डिजाईन ग्रेजुएट के लिए अवसर उपलब्ध करवाता है | अगले दस वर्षो में उधोग की हस्तियों के कारोबार की मिश्रित वार्षिक वृद्धि दर के चालीश प्रतिशत तक होने का अनुमान है, लेकिन इसके बाबजूद भारत का फैशन "पंख उगने" की स्थिति में है और मेहनती, उत्साही और प्रतिभाशाली युवाओं के लिए इसमें भरपूर अवसर है |"


योग्यता - 10 + 2 के बाद फैशन डिजाइनिंग में डिप्लोमा या डिग्री अवधि: 1 से 2 वर्ष |
शुरुआत - फ्रेशर के रूप में 5000 रुपए |
भविष्य - एक वर्ष से अधिक के अनुभव के बाद 8000 से 35,000 रुपए |
काम - डिज़ाइनर, डिजाईन मेनेजर, क्रिएटिव पैटर्न मेकर, कॉस्टयूम डिज़ाइनर, फैशन जर्नलिस्ट, कैड या कैम डिज़ाइनर, फैशन कार्दिओं नेटर आदि |
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3. रचो अनोखा संसार - ग्राफ़िक डिज़ाइनर -

ग्राफ़िक डिज़ाइनर में कई तरह के छेत्र शामिल है, जैसे टाइपोग्राफी, केलीग्राफी, प्रिंटिंग टेकनिक्स, फोटोग्राफी, इलस्ट्रेशन, पेंटिंग, मल्टीमीडिया, कंप्यूटर एड्ड डिजाईन बुक, Magzine व् एडवरटाइजिंग पैकिंग, लेवल डिजाईन और डेस्कटॉप पब्लिशिंग आदि | एक ग्राफ़िक डिज़ाइनर के तोर पर सेवाए और उत्पाद को बढ़ावा देने सम्वन्धी प्रचार समस्याओं को हल करने के लिए आईडिया सोचना होगा | एक लेख के चित्र और शब्दों का ले आउट, मैग्जीन और बुक के लिए डिजाईन Visualization Advertisement, पोस्टर, सेल्स ब्रोचर, स्टेशनरी, प्रोडक्ट पैकिंग, क्रेडिट, फिल्म और टीवी प्रोग्राम के लिए छोटी सी होर्डिंग का डिजाईन बनाना होगा | उसके बाद सभी तरह की तकनीक उपयोग करनी होगी | ग्राफ़िक डिजाईन में टेक्नोलॉजी लगातार बहतर होती रहती है, इसके पहले यह निश्चित कर ले कि जो आप सीख रहे है वह नई तकनीक हो | आर्ट कॉलेज, आर्किटेक्ट स्कूल, और कमर्शियल आर्ट को Bachelor ऑफ़ फाइन आर्ट कोर्सेज के तहत आर्ट कॉलेज में पढ़ाया जाता है | स्नातक डिप्लोमा स्तर पर कोर्स पोलिटेक्निक और निजी आर्ट स्कूल में कराया जाता है |


योग्यता - 10 + 2 या ग्रेजुएशन फाइन आर्ट करने के बाद डिजाईन में डिप्लोमा / डिग्री अवधि: 6 महीने से 1वर्ष
शुरुआत - फ्रेशर के रूप में 5,000 हजार से 10,000 हजार रुपए |
भविष्य - दो से तीन वर्ष के अनुभव के बाद 15,000 से 50,000 रुपए मासिक वेतन |
काम - जूनियर Visualization से लेकर आर्ट डायरेक्टर (एडवरटाइजिंग एजेंसी, न्यूज़ पेपर, पब्लिशिंग हाउस, फिल्म प्रोडक्शन, डिजाईन स्टूडियो, आर्ट स्कूल) कार्टूनिस्ट और इलस्ट्रेशन |
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4. हर डिजाईन से निखरे संसार - इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग और प्रोडक्ट -

डिजाईन में किया गया 5 प्रतिशत निवेश उत्पाद की लागत 70 प्रतिशत तक घटा सकता है | इस काम में मदद करते है उत्पाद व उधोगिक डिज़ाइनर जो उपभोगता व निर्माता से सूचनाए प्राप्त कर, उनका विशलेषण करते है तथा संश्लेषण कर कलात्मक प्रतिभा के अनुसार तथा डिजाईन तेयार करते है | दरअसल यह अच्छा उत्पाद बनाने, में मांग है | एक उधोगिक डिज़ाइनर के रूप में किसी भी छेत्र जैसे प्रोडक्ट डिजाईन, Furniture तथा सिरेमिक डिजाईन का चुनाव कर सकते है | डिज़ाइनर इंजिनियर उत्पादों के संचालन तथा उनकी डिजाईन के लिए जिमेदार होते है | वे उपलब्ध उत्पादों की डिजाईन में सुधार भी करते रहते है | इंडस्ट्री और प्रोडक्ट डिजाईन में Btech डिग्री कोर्स आईआईटी-मुंबई, आईआईटी- गुवाहटी तथा एनआईटी में उपलब्ध है | स्नातक डिग्री कोर्स एनआईटी जैसे प्रमुख डिजाइनिंग स्कूलों में उपलब्ध है | मास्टर कोर्स देश में 4 इंजिनियर कॉलेजों में ही उपलब्ध है |


योग्यता - इंजिनियर/आर्किटेक्चर या कला, डिजाईन में स्नातक अवधि - 6 महीने से 1 वर्ष |
शरुआत - फ्रेशर के रूप में 15,000 से 25,000 रुपए |
भविष्य - दो से तीन वर्ष के अनुभव के बाद 30,000 से 1,00,000 रुपए मासिक वेतन |
काम - प्रमुख डिज़ाइनर, विशिष्ट डिजाइनिंग परामर्शदाता या स्वतंत्र रूप से भी बिज़नस शुरू कर सकते है |
संस्थान - गुरुनानक विश्वविद्यालय, अमृतसर | आईआईटी गुवाहाटी, गुवाहाटी |


5. तरासे चमक-चमक - जेम और ज्वेलरी डिजाइनिंग 

कीमती तथा अन्य धातुओं, हीरों, कीमती तथा अर्द्धकीमती पथरो, टेराकोटा, कांच और लकड़ी के बीड्स प्लास्टिक, कावरी सेल्स तथा अन्य समाग्री के साथ आपको काम करना होता है और परम्परागत तथा आधुनिक डिजाईन काम में लेनी होती है | आप परम्परागत हीरे-मोती के जवाहरात के छेत्र में विशेषग बन सकते है | ज्वेलरी डिजाइनिंग तथा जेमोलोजी में छटाई, वर्गीकरण, मुल्यांकण पहचान तथा कीमती व् अर्ध कीमती पथरों की छटाई समिलित है, जबकि ज्वेलरी डिजाईन में आभुषन को बनाने का तरीका सिखाया जाता है | ज्वेलरी व् जेम डिजाईन को लेकर भविष्य उज्ज्वल है क्युकि नये ट्रेंड के दोरान परम्परागत गहने भी शोरूम के काउंटर पर मिलने लगे है तथा विश्व के वालमार्ट तथा जोशी पैनी जैसे बड़े विक्रेताओं ने भारत के जवाहरात में दिलचस्पी दर्शायी है | इस कारण एस छेत्र में जवाहरात निर्यात के नये अवसर खुले है |


योग्यता - 10 + 2 या डिजाइनिंग में डिप्लोमा या डिग्री चाहिए : अवधि - 6 महीने से 3 वर्ष
शुरुआत - प्रशिशु के रूप में 7,000 से लेकर 8,000 रुपए
भविष्य - 10,000 से लेकर 50,000 रुपये प्रतिमाह
काम - डिज़ाइनर, सलाहकार, लेखक, कटिंग एक्सपर्ट, विसिटिंग फैकल्टी
संसथान - जैम एंड जेवेलेरी एक्सपर्ट प्रमोशन काउंसिल, जयपुर | जैमोलोजिकल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया, एसएनडीटी व वुमेन्स यूनिवर्सिटी, | जेडी इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट नॉएडा, गुडगाँव | पर्ल अकादमी ऑफ़ फैशन, न्यू दिल्ली |


6. नेट की दुनिया बनाये आसान - वेब डिजाइनिंग -

वेब के लिए डिजाईन करने का मतलब है, सिंक में इस तरह डिजाईन करना जैसा लोग वेब को सचमुच इस्तेमाल करते है | इससे रचनात्मकता के साथ तकनीकी रूप में से भी समान मात्रा में प्रोफेशनल होना पड़ता है | वेब डिजाईन पहले ग्राफ़िक इमेज तेयार करता है और फिर उसे वेब पेज पर व्यवस्थित करता है | वेबसाइट टारगेट यूजर के लिए उपयोगी होनी चाहिए, वह भी बिना इस्तेमाल में मुस्किल दिखे | वेब डिज़ाइनर का काम होता है ग्राफ़िक बनाना, इलस्ट्रेशन, फोटोग्राफी या ऑडियो - विडियो समाग्री डालना ताकि वेबसाइट पर उपलब्ध सामाग्री का अंदाजा लग जाये | मिक्रोमीडिया के ड्रीमवीवर और फ़्लैश ने वेब डेवलपमेंट को और रोचक बना दिया है और HTML इसे आसानी से तेयार करने में मदद करता है | फ़्लैश मूवी, जावा एप्लेट, एनीमेशन और अन्य रिच मीडिया भी लोकप्रिय हो रहे है | इन्टरनेट की दिनों - दिन बढती लोकप्रियता से इसकी सम्वाभनाओ का कोई अंत नही है, लेकिन इसके लिए आधुनिकतम तकनीकों का इस्तेमाल आना जरूरी है | 


योग्यता - 10 + 2 के बाद वेब डिजाईन या मल्टीमीडिया में Bachlor डिग्रीअवधि - 6 महीने से 2 वर्ष शुरुआत - ट्रेनी के रूप में 5,000 से 10,000 रुपए मासिक
फ्रीलान्स के रूप में 4,000 से 5,000 रुपए तक |
काम - वेब डिजाईन, एनिमेटर, आर्ट डायरेक्टर, डिजाईन मैनेजमेंट या फ्रीलान्स डिज़ाइनर
संसथान - सेण्टर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस कंप्यूटिंग, चंडीगढ़ | एनआईआईटी सीएमसी लिमिटेड, जनकपुरी | एरीना मल्टीमीडिया (एप्टेक लिमिटेड), नई दिल्ली | सेंट्रल सिस्टम एंड टेक्नोलॉजी, जयपुर 


7. हर कोना लगे खुबसूरत - इंटीरियर  डिजाइनिंग -

प्रदूषण रहित तकनीक, प्राकृतिक रंग, बायोग्रेडेबल मटेरियल और सोलर उर्जा आदि के प्रति बढती जागरूकता ने इंटीरियर डिजाईन में कई और विकल्प जोड़ दिए है जैसे यह मटेरिअल, फिनिसेज और फैब्रिक की ढेर सारी वेराइटी और हाई-टेक कंप्यूटर प्रोग्राम रंग, Furniture और जगहों का सही इस्तेमाल | ऑफिस, होटल, फार्म हाउस, शोरूम, स्टूडियो, स्कूल, हॉस्पिटल, थिएटर डिस्प्ले, ऑटोमोबाइल डिस्प्ले सेण्टर, जहाज और हवाई जहाज तक में इसकी जरूरत देखी जा सकती है | इसके अलाबा विशेष कार्यक्रम जैसे उत्पाद की लांचिंग, इन्टरटेनमेंट प्रोग्राम को भी डिजाईन करना पड़ता है | इसमें जगह को जरूरत के अनुसार व्यवस्थित करना होता है ताकि हर एक इंच जगह का सदपयोग हो | ओपचारिक ट्रेनिंग के आलावा प्रोजेक्ट को एक सही आकार देने के शऊर, किसी समस्या को सुलझाने का वैज्ञानिक तरीका, रचनात्मकता और स्थिर दिमांग, रंग और डिजाईन की समझ, क्लाइंट की जरूरतों, पसंद और लाइफ स्टाइल को समझना आना चाहिए |

योग्यता - 10 + 2 या फाइन आर्ट्स / एप्लाइड आर्ट्स / आर्किटेक्चर में ग्रेजुएशन के बाद इंटीरियर डिजाईन में डिप्लोमा या डिग्री
अवधि - 6 महीने से 2 वर्ष
शुरुआत - ट्रेनी के रूप में काम का प्रतिशत मिलता है
भविष्य - दो से तीन वर्ष के अनुभव के बाद 6,000 से 8,000 रुपए तक वेतन | कंसलटेंट या फ्रीलान्स के रूप में 2,500 से 4,000 रुपए प्रति ड्राइंग या सुपरविजन के लिए
काम - इवेंट व इंडस्ट्रियल डिज़ाइनर, लैंडस्केप आर्किटेक्चर, विसुअल व सेंट डिज़ाइनर आदि
संसथान - एपीजे इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिज़ाइनर, नई दिल्ली | एनआईएफडी, चंडीगढ़ | स्कूल ऑफ़ इंटीरियर डिजाईन | निर्मला निकेतन, जेजे स्कूल ऑफ़ आर्ट्स, मुंबई | 


8. संभावनाओं का ताना-बाना - टेक्सटाइल डिजाइनिंग 

पारिवारिक व्यवसाय से बदलकर भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब प्रोफेशनल और अवसरों से युक्त उधोग बन गया है, जो हर साल लाखों लोगो को नौकरी देता है | ह्युमन रिसोर्सेस कंसल्टेंसी फार्म एडेको के अनुसार यह सबसे तेजी से बढने वाले छेत्रो में से एक है और आने वाले तीन सालों में लाखो नौकरी के अवसर देगा | सम्भावना है की इंडियन विजन 2020 के अनुसार यह छेत्र अगले पांच सालों में 7 मिलियन नौकरी के अवसर उपलब्ध करवाएगा और 2020 तक 35 मिलियन नौकरी इसी छेत्र की उपज होगी | इसमें टेक्नोलोजिस्ट और स्टाइलिस्ट से लेकर सेल्स और मार्केटिंग प्रोफेशनल्स को जरूरत पड़ेगी | टेक्सटाइल में कॉटन, सिल्क, वूल या सिथेटिक से लेकर मशीन एम्ब्राडरी, नीटवियर और लेश मेकिंग तक की प्रक्रिया और बुनाई शामिल है | इसके  साथ ही उपभोक्ता की आवश्यकता और फैशन ट्रेंड के बारे में जानना होता है |

योग्यता - 10 + 2 के बाद टेक्सटाइल डिजाइनिंग में अंडरग्रेजुएट डिग्री अवधि -2 से 4 वर्ष
शुरुआत  - ट्रेनी के रूप में 10,000 से 12,000 रुपए
भविष्य - अनुभव के बाद जूनियर प्रोफेशनल  इंट्री लेवल पर 35 से 85 हजार रुपए
काम - तेच्नोलाजिस्ट, स्टाइलिस्ट, फैब्रिक डिज़ाइनर, निट  वियर एक्सपर्ट, होजरी और होम   फुर्निशिंग एक्सपर्ट, सेल्स और मार्केटिंग प्रोफेशनल व फ्रीलांसर
संसथान - नेशनल इंस्टिट्यूट  ऑफ़ डिजाईन, अहमदाबाद | नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी | पर्ल अकादमी ऑफ़ फैशन, आईआईटी, नई दिल्ली | 




आज का विचार -

दोस्तों! बिना समझी, रटी शिक्षा जीवन में 
कभी सही दिशा नही दे सकती 

शिक्षा और दिशा